5G नेटवर्क की सच्चाई क्या है ? Real Vs Fake

5/5 - (1 vote)

दोस्तों जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं इंडिया में 5G लॉन्च बहुत ही जल्द होने वाला है कंपनियों ने अलग-अलग फ्रीक्वेंसी के राइट्स सरकार से खरीद लिए हैं। बहुत ही जल्द हम 5G नेटवर्क का इस्तेमाल कर पाएंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैसे असली 5G नेटवर्क की पहचान कैसे करना है?

आज के इस आर्टिकल में हम इसी टॉपिक के बारे में विस्तार से बात करने वाले हैं। आने वाले समय में हम सब 5G नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले हैं तो क्यों नहीं इसके बारे में पहले ही जान लिया जाए कि असली 5G नेटवर्क कौन है इसकी पहचान कैसे की जाएगी।

कौन सी कंपनी का 5G नेटवर्क हमें लगवाना है और कौन सी कंपनी का 5G नेटवर्क हमें नहीं लगाना है इसके बारे में जानकारी होना आवश्यक है।

इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानेंगे 5G नेटवर्क कब लांच किया जा रहा है?, कब 5G नेटवर्क मोबाइल में इस्तेमाल करने को मिलेगा?, इसकी प्राइस क्या होगी और भी इसी प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी इस आर्टिकल में आपको मिलने वाली है।

कौन सी कंपनी सबसे पहले लॉन्च करेगी 5G नेटवर्क ?

5G नेटवर्क की फ्रीक्वेंसी सरकार द्वारा प्राइवेट कंपनियों को बेच दी गई है। इंडिया में सबसे पहले 5G नेटवर्क की शुरुआत Jio कंपनी द्वारा किया जाएगा। जानकारी के अनुसार Jio कंपनी 5G नेटवर्क की शुरुआत 11 अक्टूबर 2022 से केवल मेट्रो सिटीज में करेगा।

हालांकि केवल लॉन्चिंग मात्र से आपको 5जी की स्पीड नहीं मिलेगी। पूरी तरह से 5G नेटवर्क का फायदा उठाने के लिए आपको करीब 1साल से 1.5 साल का इंतजार करना पड़ेगा।

धीरे-धीरे हर कंपनी अपना 5जी नेटवर्क तैयार करेगी और करीब दिसंबर 2023 तक पूरी तरह यह प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी जिससे भारत में पूरी तरह से 5G नेटवर्क का इस्तेमाल गांव से लेकर शहर तक हर व्यक्ति कर पाएगा।

TRAI ने दिए नए आदेश: हर कंपनी को रखना होगा 30 दिनों वाला प्लान

5G नेटवर्क टेक्नोलॉजी कैसे काम करता है ? | क्या है 5G नेटवर्क टेक्नोलॉजी

5G नेटवर्क टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है।

  1. Standalone
  2. Non-Standalone

Standalone

इस तरह की 5G टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए कंपनी को पूर्ण रूप से पुराने नेटवर्क की जगह पर एक नया नेटवर्क बिछाने की आवश्यकता पड़ेगी। यानी कि 4G नेटवर्क की सहायता से 5G नेटवर्क की सुविधा नहीं दी जाएगी बल्कि इसकी जगह पर कंपनी 5G टेक्नोलॉजी के लिए नए टावर और नेटवर्क स्थापित करेगी।

यह नेटवर्क पूरी तरह से 5G टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा। यानी कि हम कह सकते हैं यह नेटवर्क टेक्नोलॉजी पूर्ण रूप से 5G नेटवर्क टेक्नोलॉजी है।

जिओ कंपनी द्वारा इसी नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 5G की सुविधा ग्राहकों को पहुंचाने का वादा किया गया है।

Non-Standalone

यह नेटवर्क टेक्नोलॉजी पूर्ण रूप से 5G टेक्नोलॉजी पर आधारित नहीं होता है। या फिर यह कह सकते हैं इस टेक्नोलॉजी में कंपनी 4G का इस्तेमाल करके 5जी की सुविधा प्रदान करेगी।

इसके लिए कंपनी को अलग से टावर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी बल्कि पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही 5जी की सुविधा प्रदान की जा सकेगी।

इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया आदि कंपनियां करने वाली हैं। इस नेटवर्क को हम पूर्ण रुप से 5G नेटवर्क ना कहकर 4G नेटवर्क की सहायता से 5G की सुविधा प्रदान करने वाला नेटवर्क कह सकते हैं।

5G टेक्नोलॉजी में क्या है फ्रीक्वेंसी का खेल?

इस टेक्नोलॉजी में फ्रीक्वेंसी के बारे में जानकारी रखना बहुत ही इंपॉर्टेंट है। टेलीकॉम कंपनियों ने अलग-अलग फ्रीक्वेंसी को खरीद रखा है। चलिए समझते हैं क्या है फ्रीक्वेंसी का खेल कैसे या काम करेगी।

5G Network Frequencies

5G टेक्नोलॉजी में कितने प्रकार की फ्रीक्वेंसी रखी गई है?

इस टेक्नोलॉजी में फ्रीक्वेंसी को मुख्य रूप से दो भागों में बांट दिया गया है।

  1. Lower Frequency
  2. Higher Frequency

Lower Frequency 700 मेगा हर्ट्ज से लेकर 900 मेगाहर्ट्ज तक होती है। इस फ्रीक्वेंसी की खास बात है कि यह ज्यादा से ज्यादा है क्षेत्रफल कवर करेगा। यानी कि इस फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करने वाली कंपनी ज्यादा लोगों तक इंटरनेट पहुंचाने में सफल रहेगी।

जानकारी के अनुसार जिओ कंपनी ने कम फ्रीक्वेंसी वाले प्लान को खरीदा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक नेटवर्क पहुंचाया जा सके। Lower Frequency नेटवर्क ज्यादा से ज्यादा लोगो तक नेटवर्क तो पहुंचा सकती है लेकिन इसमें स्पीड कम देखने को मिलेगा।

Higher Frequency इसके उल्टा काम करता है यानी कि इस फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां ज्यादा लोगों तक अपना नेटवर्क नहीं पहुंचा पाएंगे लेकिन स्पीड आपको high-frequency में ज्यादा देखने को मिलेगा।

Apple 14 Pro Dynamic Island Feature अब एंड्रॉयड में भी उपलब्ध

वोडाफोन आइडिया और एयरटेल जैसी कंपनियां हाई फ्रिकवेंसी के साथ काम करने वाली है। यहां पर आपको स्पीड अधिक देखने को मिलेगा। इस फ्रिकवेंसी के अंतर्गत 21 मेगाहर्ट्ज से लेकर 26 मेगाहर्ट्ज और इससे भी अधिक की फ्रीक्वेंसी रखी गई है।

फ्रीक्वेंसी के अलावा 5G बैंड भी स्पीड और नेटवर्क क्वालिटी मैं महत्वपूर्ण रोल अदा कर सकता है। चलिए जानते हैं कैसे 5g बैंड फ्रीक्वेंसी से जुड़ा हुआ है।

5G बैंड और फ्रीक्वेंसी का क्या संबंध है ?

जिस प्रकार फ्रीक्वेंसी कई प्रकार की है उसी प्रकार 5G बैंड भी कई प्रकार के होते हैं। जैसे n28, n5, n77, n78, आदि। कुल मिलाकर करीब 12 से 13 5G बैंड होते हैं।

image 3

आजकल हर 5G मोबाइल की स्पेसिफिकेशन के साथ कितने बैंड का 5G नेटवर्क आपको मिलेगा हर जानकारी पहले ही दी जाती है। ज्यादातर मोबाइल में 12 बैंड 5G नेटवर्क सपोर्ट की सुविधा मिलती है। जितना ज्यादा बैंड आपका मोबाइल सपोर्ट करेगा 5G नेटवर्क की स्पीड आपके मोबाइल में उतनी ही ज्यादा प्राप्त होगी। यानी कि ज्यादा बैंड ज्यादा स्पीड।

क्या 5G नेटवर्क का इस्तेमाल 4G सिम से हो पाएगा?

यह एक बड़ा सवाल है जैसा कि हम सभी जानते हैं 4G नेटवर्क आने पर हम हैं 3g सिम को बदलना पड़ा था और उसके स्थान पर 4G सिम का इस्तेमाल करना पड़ा।

लेकिन हर कंपनी के साथ ऐसा नहीं था केवल जिओ कंपनी के सिम के साथ ही आपको 4G सिम लेनाआवश्यक था बाकी अन्य कंपनियां 3g सिम के साथ ही 4G नेटवर्क का इस्तेमाल करने की सुविधा दे रही थी।

इसका कारण यह था कि जिओ द्वारा दी जाने वाली 4G सुविधा पूरी तरह से 4G टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। जबकि अन्य मोबाइल कंपनियां पुराने नेटवर्क पर ही की 4G सुविधा दे रही थी।

5G नेटवर्क के लिए जिओ कंपनी फिर से नए नेटवर्क बनाने जा रही है तो 90% संभावना है कि 4G सिम की जगह हमें नए सिम लेने की आवश्यकता पड़े हालांकि नंबर पुराने ही रहेंगे। जिओ कंपनी ने नए नेटवर्क बनाने के लिए करीब 2 लाख करोड रुपए खर्च करने का बजट बनाया है। यह एक बहुत बड़ा अमाउंट है यानि की एक अच्छी स्पीड देखने को मिलने वाली है।

अन्य कंपनियों की 5G टेक्नोलॉजी की सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए सिम बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी क्योंकि वह पुराने नेटवर्क पर ही 5G नेटवर्क देने जा रहे हैं।

5G नेटवर्क में क्या मिलेगी स्पीड?

वर्तमान समय में यदि हम जिओ के 4G नेटवर्क का स्पीड टेस्ट करते हैं तो पूर्ण रूप से नेटवर्क होने की स्थिति में 50MB से लेकर 70 एमबी तक की स्पीड देखने को मिलती है। लेकिन, सही मायने में स्पीड 6 एमबी से लेकर 8 एमबी प्रति सेकंड तक होती है।

image 2

इस डाटा के अनुसार 5G टेक्नोलॉजी आने से स्पीड टेस्ट करते समय नेटवर्क की स्पीड 1gbps तक जा सकती है। और सही मायने में स्पीड 40mb से लेकर 50MB तक मिलने वाली है। वर्तमान समय की4G टेक्नोलॉजी से अगर तुलना किया जाए तो यह स्पीड करीब 8 से 10 गुना अधिक है।

5G रिचार्ज कितने का होगा ?

जिस प्रकार 4G प्लान में अलग-अलग तरह के रिचार्ज है उसी तरह 5G में भी अलग-अलग तरह के रिचार्ज देखने को मिलेंगे। लेकिन यह रिचार्ज कितना होगा यह तो 5जी लांच होने के बाद ही बताया जा सकता है।

अगर अलग-अलग रिपोर्ट की माने तो टेलीकॉम कंपनियां 5G रिचार्ज को भी कम से कम बजट में रखने की कोशिश करने वाली है। स्पीड बढ़ रही है तो आपको पैसा भी ज्यादा देना पड़ेगा जैसे अगर आप 1 महीने का प्लान किसी कंपनी में 250 का ले रहे हैं तो वह 350 तक जा सकता है। लगभग 30% से लेकर 40% तक प्राइस में अंतर देखने को मिलेगा।

नेटवर्क की स्पीड पर रिचार्ज प्लान निर्भर करेगा अगर आपको स्पीड ज्यादा मिलेगी तो रिचार्ज प्लान महंगे हो सकते हैं और कम स्पीड वाले रिचार्ज प्लान सस्ते हो सकते हैं।

क्योंकि जिओ लो फ्रिकवेंसी पर काम करने वाला है तो यहां पर स्पीड आपको थोड़ी कम देखने को मिलेगी तो इसके रिचार्ज सस्ते मिलेंगे वहीं एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया यह कंपनियां हाई फ्रिकवेंसी पर काम करने वाली है यानी की स्पीड आपको अधिक मिलने वाला है तो यहां पर आपको रिचार्ज महंगा देखने को मिल सकता हैं।

क्या है असली और नकली 5G में अंतर

असली और नकली 5G दोनों का अंतर करना बहुत ही आसान है। जैसा कि हमने आर्टिकल में बताया जिओ कंपनी लो फ्रिकवेंसी के साथ एक नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने वाला है जहां पर 4G को हटाकर पूरी तरह से 5G टेक्नोलॉजी के लिए टावर लगाए जाएंगे। असली 5G कहते हैं।

दूसरी तरफ एयरटेल वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियां अपने पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर यानी कि 4G टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करके 5G नेटवर्क की सुविधा प्रदान करने वाले हैं। इसे हम पूर्ण रूप से नहीं कर सकते बल्कि 4G नेटवर्क का एक अपग्रेडेड वर्जन कह सकते हैं।

उम्मीद है आपको असली और नकली 5G नेटवर्क में अंतर पता चल गया होगा। लेकिन क्या एयरटेल वोडाफोन द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं अच्छी नहीं होने वाली है? इस सवाल का जवाब नहीं दे सकते क्योंकि एयरटेल और वोडाफोन कंपनी हाई फ्रिकवेंसी पर काम करने वाली है यानी कि यह कंपनियां अच्छी स्पीड देने के लिए काम कर रहे हैं।

अगर हमें 4g टेक्नोलॉजी की अपग्रेडेड वर्जन पर असली 5G टेक्नोलॉजी से अच्छी स्पीड प्राप्त होती है तो हम 4G के इसी अपग्रेडेड वर्जन को अच्छा मान सकते हैं।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में 5G टेक्नोलॉजी से जुड़ी हर जानकारी दी गई है जो कि एक आम नागरिक को जाना चाहिए। आने वाले समय में बहुत ही जल्द 5G टेक्नोलॉजी भारत में लॉन्च कर दिया जाएगा जिसका हम इस्तेमाल कर पाएंगे तो कौन से नेटवर्क में हमें जाना चाहिए इसके बारे में जानकारी अगर नहीं होगी तो हम असली और नकली 5G के बारे में पहचान नहीं कर पाएंगे। आशा करता हूं आपको जानकारी अच्छी लगी होगी और इंफॉर्मेशन मिली होगी।

Sharing Is Caring:

Hi There! this is Er. Durgesh a professional blogger, having 5 years of experience in blogging. I love to gather information and write about them. The aim of this blog is to keep you posted with every important update. So, keep visiting and keep learning.

Leave a Comment